श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  2.25.131 
अतएव भागवते एई ‘तिन’ कय ।
सम्बन्ध - अभिधेय - प्रयोजन - मय ॥131॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने आगे कहा, "इस प्रकार भगवान के साथ व्यक्ति का संबंध, भक्तिमय सेवा के कार्य, तथा जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य, भगवद्प्रेम की प्राप्ति, श्रीमद्भागवतम् के विषय हैं।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu further explained, “Man's relationship with God, devotional activities and devotion and attainment of love of God, the ultimate goal of life – these are the three subjects of Srimad Bhagavatam.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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