श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 25: वाराणसी के सारे निवासियों का वैष्णव बनना  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  2.25.116 
एइ सब शब्दे हय - ज्ञान - विज्ञान’ - विवेक ।
माया - कार्य, माया हैते आमि - व्यतिरेक ॥116॥
 
 
अनुवाद
[भगवान कृष्ण ने आगे कहा:] 'वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान और उसका व्यावहारिक अनुप्रयोग इन सभी ध्वनि स्पंदनों में निहित है। यद्यपि बाह्य ऊर्जा मुझसे आती है, मैं उससे भिन्न हूँ।'
 
"[Lord Krishna continued:] 'All these words contemplate true spiritual knowledge and its practical application. Although the external energy originates from Me, I am distinct from it.'"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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