श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.24.56 
का स्त्र्यङ्ग ते कल - पदामृत - वेणु - गीत - सम्मोहितार्य - चरितान्न चलेत्रि - लोक्याम् ।
त्रैलोक्य - सौभगमिदं च निरीक्ष्य रूपं ग्रद्गो - द्विज - द्रुम - मृगाः पुलकान्यबिभ्रन् ॥56॥
 
 
अनुवाद
"हे भगवान कृष्ण, तीनों लोकों में ऐसी कौन सी स्त्री है जो आपकी अद्भुत बांसुरी से निकलने वाले मधुर गीतों की लय पर मोहित न हो जाए? इस प्रकार कौन पतिव्रता धर्म के मार्ग से विचलित न हो जाए? तीनों लोकों में आपका सौंदर्य परम उदात्त है। आपके सौंदर्य को देखकर गायें, पक्षी, पशु और वन के वृक्ष भी आनंद से स्तब्ध हो जाते हैं।"
 
"O Lord Krishna, what woman in the three worlds would not be captivated by the sweet music emanating from your wondrous flute? What woman would not be deviated from her chaste path in this way? Your beauty is supreme in all three worlds. Seeing your beauty, cows, birds, animals, and even the trees of the forest stand motionless with joy."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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