श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.24.42 
ऐश्वर्य - माधुर्य - कारुण्ये स्वरूप - पूर्णता ।
भक्त - वात्सल्य, आत्म - पर्यन्त वदान्यता ॥42॥
 
 
अनुवाद
"कृष्ण के ऐश्वर्य, माधुर्य और दया जैसे दिव्य गुण पूर्ण एवं परिपूर्ण हैं। जहाँ तक कृष्ण के अपने भक्तों के प्रति स्नेहपूर्ण झुकाव का प्रश्न है, वे इतने उदार हैं कि वे स्वयं को अपने भक्तों को समर्पित कर सकते हैं।
 
"Krishna's transcendental qualities of opulence, sweetness, and compassion are complete in every way. As for Krishna's affection for his devotees, he is so generous that he even gives himself to them."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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