श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.24.41 
‘गुण’ शब्देर अर्थ - कृष्णेर गुण अनन्त ।
सच्चिद् - रूप - गुण सर्व पूर्णानन्द ॥41॥
 
 
अनुवाद
"गुण" शब्द का अर्थ है "गुणवत्ता"। कृष्ण के गुण दिव्य रूप से स्थित हैं और उनकी मात्रा असीमित है। सभी आध्यात्मिक गुण दिव्य आनंद से परिपूर्ण हैं।
 
"Krishna's qualities are transcendental and infinite. All spiritual qualities are full of transcendental bliss."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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