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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 325
 
 
श्लोक  2.24.325 
मुञि - नीच - जाति, किछु ना जानों आचार ।
मो - हैते कैछे हय स्मृति - परचार ॥325॥
 
 
अनुवाद
"मैं अत्यंत निम्न कुल का व्यक्ति हूँ। मुझे अच्छे आचरण का कोई ज्ञान नहीं है। मैं वैष्णव गतिविधियों के बारे में अधिकृत निर्देश कैसे लिख सकता हूँ?"
 
"I am a very lowly person. I have no knowledge of good conduct. How can I possibly write authoritative instructions on the activities of Vaishnavas?"
तात्पर्य
वास्तव में सनातन गोस्वामी एक बहुत ही सम्मानित ब्राह्मण परिवार से थे। इसके बावजूद, उन्होंने खुद को एक पतित और नीच व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया क्योंकि उन्होंने मुस्लिम सरकार में काम किया था। एक ब्राह्मण को कभी भी किसी की सेवा में संलग्न नहीं होना चाहिए। आजीविका के लिए दूसरों की सेवा करना (परिचर्यत्मकं कर्म) शूद्रों का व्यवसाय है। ब्राह्मण हमेशा स्वतंत्र होता है और शास्त्र का अध्ययन करने और क्षत्रिय और वैश्यों जैसे अधीनस्थ सामाजिक सदस्यों को शास्त्र का प्रचार करने में व्यस्त रहता है। सनातन गोस्वामी ने वैष्णवों के व्यवहार के बारे में वैष्णव स्मृति लिखने के लिए खुद को अयोग्य महसूस किया क्योंकि वह ब्राह्मण स्थिति से गिर गए थे। इस प्रकार सनातन गोस्वामी स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं कि ब्राह्मण संस्कृति मानकीकृत होनी चाहिए। वर्तमान में भारत में, तथाकथित ब्राह्मण लगभग सभी किसी न किसी सांसारिक सेवा में लगे हुए हैं, और वे वैदिक शास्त्रों के महत्व को नहीं समझते हैं। फिर भी, वे जन्म के आधार पर खुद को ब्राह्मण बता रहे हैं। इस संबंध में, सनातन गोस्वामी घोषणा करते हैं कि यदि कोई ब्राह्मण समाज में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है तो वह किसी की सेवा में संलग्न नहीं हो सकता। श्रीमद-भागवतम में नारद मुनि कहते हैं कि भले ही कोई ब्राह्मण कठिन परिस्थिति में हो, लेकिन उसे शूद्र का व्यवसाय स्वीकार नहीं करना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि उसे दूसरे के लिए सेवा में नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि यह कुत्तों का व्यवसाय है। इन परिस्थितियों में, सनातन गोस्वामी ने बहुत ही नीच महसूस किया क्योंकि उन्होंने मुस्लिम सरकार में सेवा की स्थिति स्वीकार कर ली थी। निष्कर्ष यह है कि किसी को भी केवल जन्मसिद्ध अधिकार से ब्राह्मण होने का दावा नहीं करना चाहिए जबकि वह किसी और की सेवा में लगा हो।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)