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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 312
 
 
श्लोक  2.24.312 
‘एक - षष्टि’ अर्थ एबे स्फुरिल तोमा - सङ्गे ।
तोमार भक्ति - वशे उठे अर्थेर तरङ्गे ॥312॥
 
 
अनुवाद
"अब आपकी संगति से एक और अर्थ जागृत हुआ है। आपकी भक्ति के कारण ही ये अर्थ तरंगें उठ रही हैं।"
 
"Now, through your company, another meaning has emerged. It is because of your devotion that waves of meaning are rising."
तात्पर्य
आत्मा शब्द जीवित सत्ता को संदर्भित करता है। भगवान ब्रह्मा से लेकर एक तुच्छ चींटी तक, हर किसी को एक जीवित सत्ता माना जाता है। जीवित संस्थाओं को भगवान की सीमांत शक्ति का हिस्सा माना जाता है। ये सभी क्षेত্র-ज्ञ हैं, शरीर के ज्ञाता हैं। जब वे निर्ग्रन्थ, या संत बन जाते हैं, तो वे भगवान कृष्ण की सेवा में लग जाते हैं। यही श्लोक का इकसठवां अर्थ है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)