श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 282
 
 
श्लोक  2.24.282 
एइ त कहिलुँ तोमाय व्याधेर आख्यान ।
या शुनिले हय साधु - सङ्ग - प्रभाव - ज्ञान ॥282॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने शिकारी की घटना का वर्णन किया है। इस कथा को सुनने से भक्तों की संगति का प्रभाव समझ में आता है।
 
Thus I have described the incident of the hunter. By listening to this story, one can understand the effect of the company of devotees.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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