श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 279
 
 
श्लोक  2.24.279 
नारद कहे , - ‘वैष्णव, तोमार अन्न किछु आय?’ ।
व्याध कहे, “यारे पाठाओ, सेइ दिया याय” ॥279॥
 
 
अनुवाद
तब नारद मुनि ने शिकारी से पूछा, 'हे वैष्णव, क्या तुम्हारे पास अपने भरण-पोषण के लिए कुछ आय है?'
 
“Then Narada Muni asked the hunter, ‘O Vaishnava, do you have any income to sustain yourself?’ The hunter replied, “O Guru, whoever you send, whenever he comes to meet me, gives me something.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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