श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 257
 
 
श्लोक  2.24.257 
व्याध कहे, - ‘धनुक भाङ्गिले वर्तिब केमने?’ ।
नारद कहे , - ‘आमि अन्न दिब प्रति - दिने’ ॥257॥
 
 
अनुवाद
शिकारी ने उत्तर दिया, 'यदि मेरा धनुष टूट गया तो मैं अपना भरण-पोषण कैसे कर पाऊंगा?'
 
The hunter replied, 'If I break my bow, how will I feed myself?' Sage Narada replied, 'Don't worry. I will give you food every day.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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