श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 248
 
 
श्लोक  2.24.248 
व्याध कहे , - “किबा दान मागिला आमारे ।
अर्ध मारिले किबा हय, ताहा कह मो रे” ॥248॥
 
 
अनुवाद
शिकारी ने उत्तर दिया, 'महाराज, आप मुझसे क्या पूछ रहे हैं? इन अधमरे पड़े जानवरों को क्या हुआ है? क्या आप मुझे समझाएँगे?'
 
"The hunter replied, 'Sir, what are you asking of me? What is wrong with these half-dead animals lying there? Can you tell me?'"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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