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श्लोक 245
श्लोक
2.24.245
मृग - छाल चाह यदि, आइस मोर घरे ।
येइ चाह ताहा दिब मृग - व्याघ्राम्ब रे ॥245॥
अनुवाद
“मेरे पास बहुत सी खालें हैं, अगर तुम चाहो तो। मैं तुम्हें या तो हिरण की खाल या बाघ की खाल दे दूँगा।”
"If you need a deerskin, I have plenty. I'll give you a deerskin or a tiger skin."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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