| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ » श्लोक 244 |
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| | | | श्लोक 2.24.244  | नारद कहे , - ‘एक - वस्तु मागि तोमार स्थाने’ ।
व्याध कहे , - “मृगादि लह, येइ तोमार मने” ॥244॥ | | | | | | | अनुवाद | | “तब नारद मुनि ने शिकारी से कहा, ‘मुझे आपसे एक बात मांगनी है।’ “शिकारी ने उत्तर दिया, ‘आप जो भी जानवर या कोई अन्य चीज चाहें ले सकते हैं।’ “शिकारी ने उत्तर दिया, ‘आप जो भी जानवर या कोई अन्य चीज चाहें ले सकते हैं। | | | | “Then Narada Muni said to the hunter, ‘I want to ask you for something.’ The hunter replied, ‘You can take any animal or other thing you want.’ | | ✨ ai-generated | | |
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