श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 243
 
 
श्लोक  2.24.243 
अर्ध - मारा जीव यदि धड् - फड़ करे ।
तबे त’ आनन्द मोर बाड़ये अन्तरे ॥243॥
 
 
अनुवाद
“‘जब मैं आधे मारे गए जानवरों को तड़पते देखता हूं, तो मुझे बहुत खुशी होती है।’
 
“When I see half-dead animals suffering, I feel great joy.”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd