श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  2.24.225 
‘च’ एवार्थे - ‘मुनयः एव’ कृष्णेरे भजय ।
“आत्मारामा अपि” - ‘अपि’ ‘गर्हा’ - अर्थ कय ॥225॥
 
 
अनुवाद
"'च' शब्द का प्रयोग इस निश्चितता को दर्शाने के लिए भी किया जा सकता है कि केवल संत पुरुष ही कृष्ण की भक्ति में लगे रहते हैं। 'आत्माराम अपि' संयोजन में 'अपि' का प्रयोग निंदा के अर्थ में होता है।
 
"The word 'Cha' also indicates the determination that only the saints are busy in worshiping Krishna. In Atmaram Api Sandhi, 'Api' is used to blame (criticize)."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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