| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ » श्लोक 223 |
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| | | | श्लोक 2.24.223  | च - शब्दे ‘अन्वाचये’ अर्थ कहे आर ।
‘बटो, भिक्षामट, गां चानय’ यैछे प्रकार ॥223॥ | | | | | | | अनुवाद | | "'च' शब्द एक ही समय में किए जाने वाले किसी गौण कार्य को भी प्रस्तुत कर सकता है। 'च' शब्द को इस प्रकार समझने को अन्वाचये कहते हैं। उदाहरणार्थ, 'हे ब्रह्मचारी, भिक्षा लेने जाओ और साथ ही गायें भी लाओ।' | | | | The word "cha" has another meaning, which implies the completion of a secondary task at the same time. Understanding this meaning of cha is called anvaachaya. An example is, "O brahmacari, go begging and bring the cows along with you." | | ✨ ai-generated | | |
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