श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 186
 
 
श्लोक  2.24.186 
‘आत्मा’ - शब्दे ‘बुद्धि’ कहे बुद्धि - विशेष ।
सामान्य - बुद्धि - युक्त यत जीव अवशेष ॥186॥
 
 
अनुवाद
"आत्मा" शब्द का प्रयोग एक विशेष प्रकार की बुद्धि के लिए भी किया जाता है। चूँकि सभी जीवों में सामान्यतः कुछ न कुछ बुद्धि होती है, इसलिए उन्हें भी इसमें शामिल किया गया है।
 
"The word 'soul' is also used to refer to a specific type of intelligence. Since all living beings generally possess some intelligence, they fall into this category."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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