उरुक्रमे अहैतुकी काहाँ कोन अर्थ ।
एइ तेर अर्थ कहिलुँ परम समर्थ ॥163॥
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अनुवाद
"अहैतुकी शब्द सदैव भगवान उरुक्रम के लिए प्रयुक्त होता है। इस प्रकार मैंने [आत्माराम श्लोक के] तेरह पूर्ण अर्थ बताए हैं।"
"The word 'ahaituki' is always used for the Supreme Personality of Godhead, Urukrama. In this way, I have explained the meaning of the Atmaram verse in thirteen ways."
तात्पर्य
यहां वर्णित आत्मारामा श्लोक के तेरह अर्थ आत्मारामा शब्द के लिए निम्नलिखित अर्थों पर आधारित हैं: (1) साधक, नवगठित अभ्यस्तकर्ता; (2) ब्रह्मा-माया, अवैयक्तिक ब्रह्म के विचार में लीन; (3) प्राप्त-ब्रह्म-लय, जिसने वास्तव में ब्रह्म सिद्धि को प्राप्त किया है; (4) मुमुक्षु, जो मुक्ति चाहता है; (5) जीवन-मुक्त, जो इस जीवन में मुक्त है; (6) प्राप्त-स्वरूप, जिसने अपनी मूल संवैधानिक स्थिति प्राप्त कर ली है; (7) निर्ग्रन्थ-मुनि, एक पूर्ण रूप से मुक्त संत; (8) सगर्भ-योगारुरुक्षु, एक योगी जो चार हाथों वाले विष्णु रूप पर ध्यान करता है और योगिक पूर्णता चाहता है; (9) निगर्भ-योगारुरुक्षु, जो अवैयक्तिक ध्यान में पूर्णता के लिए प्रयास कर रहा है; (10) सगर्भ-योगारूढ़, जो विष्णु रूप पर ध्यान करके योगिक पूर्णता के मंच तक ऊंचा हो गया है; (11) निगर्भ-योगारूढ़, पूर्णता के मंच पर एक अवैयक्तिक योगी; (12) सगर्भ-प्राप्त-सिद्धि, जिसने विष्णु रूप पर ध्यान करके पूर्णावस्था प्राप्त की है; (13) निगर्भ-प्राप्त-सिद्धि, जिसने अवैयक्तिक ध्यान का अभ्यास करके पूर्णता प्राप्त की है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥