श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  2.24.158 
‘योगारुरुक्षु’, ‘योगारूढ़’ ‘प्राप्त - सिद्धि’ आर ।
एइ तिन भेदे हय छय प्रकार ॥158॥
 
 
अनुवाद
“योग में उन्नति के इन तीन विभागों - योगारूक्षु, योगारूढ़ और प्राप्तसिद्धि - से छह प्रकार के रहस्यवादी योगी होते हैं।
 
“These three divisions of progress in Yoga – Yogarurukshu, Yogarurdha and Prapti-Siddhi – lead to six divisions of Yogis.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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