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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 139
श्लोक
2.24.139
भक्ति विनु मुक्ति नाहि, भक्त्ये मुक्ति हय ॥139॥
अनुवाद
भक्ति किए बिना मोक्ष प्राप्त नहीं होता। भक्ति से ही मोक्ष प्राप्त होता है।
"No one can attain liberation without devotion. Liberation is attained only through devotion."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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