| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 24: आत्माराम श्लोक की 61 व्याख्याएँ » श्लोक 109 |
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| | | | श्लोक 2.24.109  | भक्ति विना केवल ज्ञाने ‘मुक्ति’ नाहि हय ।
भक्ति साधन करे येइ ‘प्राप्त - ब्रह्म - लय’ ॥109॥ | | | | | | | अनुवाद | | "भक्ति से रहित केवल दार्शनिक चिंतन से मोक्ष प्राप्त नहीं हो सकता। तथापि, यदि कोई भक्ति करता है, तो वह स्वतः ही ब्रह्मपद पर पहुँच जाता है।" | | | | "Liberation cannot be attained through mental contemplation alone, without devotion. But if devotion is practiced, the state of Brahman is automatically attained." | | ✨ ai-generated | | |
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