श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.23.94 
एइ रस अनुभवे यैछे भक्त - गण ।
यैछे रस हय, शुन ताहार लक्षण ॥94॥
 
 
अनुवाद
“अब सुनो कि कैसे मधुरता प्रकट होती है और कैसे भक्तों द्वारा विभिन्न दिव्य मंचों पर उनका अनुभव किया जाता है।
 
“Now listen to how the rasas manifest and how they are experienced by devotees in different positions.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)