श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.23.70 
अयं नेता सु - रम्याङ्गः सर्व - सल्लक्षणान्वितः ।
रुचिरस्तेजसा युक्तो बलीयान् वयसान्वितः ॥70॥
 
 
अनुवाद
"परम नायक कृष्ण का शरीर अत्यंत सुंदर दिव्य है। इस शरीर में सभी शुभ लक्षण विद्यमान हैं। यह दीप्तिमान और नेत्रों को अत्यंत सुखदायक है। उनका शरीर शक्तिशाली, बलवान और युवा है।"
 
"The divine body of the supreme hero, Krishna, is exceedingly beautiful. His body is endowed with all auspicious features. This body is extremely radiant and pleasing to the eye. His body is strong and full of youth (adolescence)."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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