श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  2.23.68 
देवी कृष्ण - मयी प्रोक्ता राधिका पर - देवता ।
सर्व - लक्ष्मी - मयी सर्व - कान्तिः सम्मोहिनी परा ॥68॥
 
 
अनुवाद
“दिव्य देवी श्रीमती राधारानी भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्यक्ष प्रतिरूप हैं। वे सभी सौभाग्यवती देवियों की केंद्रीय स्वरूप हैं। उनमें सर्व-आकर्षक भगवान को आकर्षित करने का सम्पूर्ण आकर्षण विद्यमान है। वे भगवान की आदि आंतरिक शक्ति हैं।”
 
“Divine Goddess Srimati Radharani is the physical embodiment of Lord Krishna. She is the focal point of all Lakshmi. She is full of all attraction to attract the all-attractive Lord. She is the original inner power of the Lord.”
तात्पर्य
यह पाठ बृहद् गौतमीय तंत्र में पाया जाता है | स्पष्टीकरण के लिए, आदि-लीला 4.83-95 देखें |
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)