श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.23.58 
अधिरूढ़ - महाभाव - दुइ त’ प्रकार ।
सम्भोगे ‘मादन’, विरहे ‘मोहन’ नाम तार ॥58॥
 
 
अनुवाद
"अत्यंत उन्नत परमानंद दो श्रेणियों में विभाजित है - मदन और मोहना। मिलन को मदन कहते हैं और वियोग को मोहना।"
 
"There are two types of the superconscious state: Madana and Mohan. Mutual union is called Madana, and separation is called Mohan."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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