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श्लोक 2.23.28  |
| ‘कृष्ण कृपा करिबेन’ - दृढ़ क रि’ जाने ॥28॥ |
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| अनुवाद |
| "एक पूर्णतः समर्पित भक्त सदैव आशा करता है कि भगवान कृष्ण उस पर कृपा करेंगे। यह आशा उसमें अत्यंत दृढ़ होती है। |
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| "A completely surrendered devotee always hopes that Lord Krishna will be gracious to him. This hope remains firm in him." |
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