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श्लोक 2.23.126  |
प्रभुर उपदेशामृत शुने येइ जन ।
अचिरात्मिलये ताँरे कृष्ण - प्रेम - धन ॥126॥ |
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| अनुवाद |
| जो कोई भी भगवान द्वारा सनातन गोस्वामी को दिए गए इन निर्देशों को सुनता है, उसे शीघ्र ही भगवान कृष्ण के प्रेम का अनुभव हो जाता है। |
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| Whoever listens to these teachings given by Mahaprabhu to Sanatana Goswami soon begins to experience Krishna-love. |
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