श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  2.23.124 
तबे महाप्रभु ताँर शिरे धरि’ करे।
वर दिला - ‘एइ सब स्फुरुक तोमारे’ ॥124॥
 
 
अनुवाद
तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपना हाथ सनातन गोस्वामी के सिर पर रखा और उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा, "ये सभी निर्देश तुम्हें प्रकट हों।"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu placed his hand on Sanatana Goswami's head and blessed him, "May all these teachings be revealed to you."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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