श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.23.104 
वृन्दावने कृष्ण - सेवा, वैष्णव - आचार ।
भक्ति - स्मृति - शास्त्र करि करिह प्रचार ॥104॥
 
 
अनुवाद
"वृन्दावन में भगवान कृष्ण और राधारानी की भक्ति स्थापित करो। तुम्हें भक्ति ग्रंथों का संकलन भी करना चाहिए और वृन्दावन से भक्ति पंथ का प्रचार भी करना चाहिए।"
 
"To establish the service of Lord Krishna and Radharani in Vrindavan. Also to compile Bhakti Shastras and to propagate the Bhakti sect from Vrindavan."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd