श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 23: जीवन का चरम लक्ष्य -भगवत्प्रेम  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.23.103 
तुमिह करिह भक्ति - शास्त्रेर प्रचार ।
मथुराय लुप्त - तीर्थेर करिह उद्धार ॥103॥
 
 
अनुवाद
“हे सनातन, आपको भक्ति सेवा पर प्रकट शास्त्रों का प्रसारण करना चाहिए और मथुरा जिले में लुप्त तीर्थ स्थानों की खुदाई करनी चाहिए।
 
“O Sanatana, you should propagate the authentic scriptures of devotion and revive the lost pilgrimage sites of Mathura district.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)