श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 22: भक्ति की विधि  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.22.62 
‘श्रद्धा’ - शब्दे - विश्वास कहे सुदृढ़ निश्चय ।
कृष्ण भक्ति कैले सर्व - कर्म कृत हय ॥62॥
 
 
अनुवाद
"श्रद्धा वह दृढ़ विश्वास है कि कृष्ण की दिव्य प्रेममयी सेवा करने से व्यक्ति स्वतः ही सभी गौण कर्म कर लेता है। ऐसी श्रद्धा भक्तिमय सेवा के लिए अनुकूल होती है।"
 
"By rendering divine loving devotion to Krishna, one automatically accomplishes all secondary duties. Such firm determination is called faith. Such faith proves conducive to the accomplishment of devotional service."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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