| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 22: भक्ति की विधि » श्लोक 3 |
|
| | | | श्लोक 2.22.3  | एइत कहिलुँ सम्बन्ध - तत्त्वेर विचार ।
वेद - शास्त्रे उपदेशे, कृष्ण - एक सार ॥3॥ | | | | | | | अनुवाद | | श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "मैंने कृष्ण के साथ मनुष्य के संबंध का विभिन्न प्रकार से वर्णन किया है। यह सभी वेदों का विषय है। कृष्ण सभी कार्यों के केंद्र हैं।" | | | | Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "I have described man's relationship with Krishna in many ways. This is the subject of all the Vedas. Krishna is the center of all activities." | | ✨ ai-generated | | |
|
|