श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 22: भक्ति की विधि  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.22.113 
स्मर्तव्यः सततं विष्णुर्विस्मर्तव्यो न जातुचित् ।
सर्वे विधि - निषेधाः स्युरेतयोरेव किङ्कराः ॥113॥
 
 
अनुवाद
"कृष्ण भगवान विष्णु के मूल हैं। उन्हें सदैव स्मरण रखना चाहिए और कभी भी नहीं भूलना चाहिए। शास्त्रों में वर्णित सभी विधि-निषेध इन्हीं दो सिद्धांतों के सेवक होने चाहिए।"
 
"Krishna is the origin of Lord Vishnu. He should be constantly remembered and never forgotten. All the rules and prohibitions mentioned in the scriptures should be subject to these two rules."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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