श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.21.87 
‘एक - पाद विभूति’ इहार नाहि परिमाण ।
‘त्रि - पाद विभूति’र केबा करे परिमाण” ॥87॥
 
 
अनुवाद
"भौतिक जगत में प्रकट मेरी एक-चौथाई शक्ति की लंबाई-चौड़ाई को कोई नहीं माप सकता। फिर आध्यात्मिक जगत में प्रकट तीन-चौथाई को कौन माप सकता है?"
 
“When no one can measure the length and breadth of even one-fourth of my power present in this physical world, then who can measure three-fourths of my power manifested in the spiritual world?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)