श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.21.6 
अनन्त वैकुण्ठ एक एक देशे यार ।
सेइ परव्योम - धामेर के करु विस्तार ॥6॥
 
 
अनुवाद
“चूँकि सभी वैकुंठ ग्रह आध्यात्मिक आकाश के एक निश्चित कोने में स्थित हैं, तो आध्यात्मिक आकाश को कौन माप सकता है?
 
“Since all the Vaikuntha planets are located in one corner of the Paravyoma, who can measure that Paravyoma?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)