सेइ त’ माधुर्य - सार, अन्य - सिद्धि नाहि तार
तिंहो - माधुर्यादि - गुण - खनि ।
आर सब प्रकाशे, ताँर दत्त गुण भासे
याहाँ यत प्रकाशे कार्य जानि ॥117॥
अनुवाद
"कृष्ण की मधुर शारीरिक प्रभा का सार इतना परिपूर्ण है कि उससे ऊपर कोई पूर्णता नहीं है। वे सभी दिव्य गुणों की अविचल खान हैं। उनके अन्य रूपों और साकार रूपों में, इन गुणों का केवल आंशिक प्रदर्शन ही होता है। हम उनके सभी साकार रूपों को इसी प्रकार समझते हैं।"
"The essence of the sweet radiance of Krishna's body is so complete that there is no greater perfection than that. He is a perpetual storehouse of divine qualities. His other forms and personal expansions display only partial manifestations of such qualities. In this way we understand all of His personal individual expansions."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥