श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 21: भगवान् श्रीकृष्ण का ऐश्वर्य तथा माधुर्य  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  2.21.116 
ताते साक्षी सेइ रमा, नारायणेर प्रियतमा
पतिव्रता - गणेर उपास्या ।
तिंहो ये माधुर्य - लोभे, छाड़ि’ सब काम - भोगे
व्रत क रि’ करिला तपस्या ॥116॥
 
 
अनुवाद
"इस संबंध में ज्वलंत प्रमाण यह है कि सभी सती स्त्रियों द्वारा पूजित, सौभाग्य की देवी नारायण की प्रियतम पत्नी, कृष्ण के अद्वितीय माधुर्य से मोहित होकर, उनका आनंद लेने की इच्छा में अपना सब कुछ त्याग दिया। इस प्रकार उन्होंने एक महान व्रत लिया और कठोर तपस्या की।
 
"Narayan's beloved, Lakshmi, is clear evidence of this. Lakshmi is worshipped by all devoted wives. It was this Lakshmi, captivated by Krishna's unparalleled sweetness, who renounced everything for the sake of enjoying his company. Thus, she took a strict vow and performed rigorous austerities."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)