श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.20.86 
सेइ कहे, - “रहस्य कर प्रामाणिक ह ञा? ।
बहु - मूल्य भोट दिबा केन काँथा लञा ?” ॥86॥
 
 
अनुवाद
भिक्षुक ने उत्तर दिया, "महाशय, आप एक सम्मानित सज्जन हैं। आप मेरे साथ मज़ाक क्यों कर रहे हैं? आप अपना कीमती कंबल मेरी फटी हुई रजाई के बदले क्यों दे रहे हैं?"
 
The sage replied, "Sir, you are a respectable gentleman. Why are you joking with me? Why would you exchange your precious blanket for my torn rag?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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