श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.20.71 
सेइ वस्त्र सनातन ना कैल अङ्गीकार ।
शुनिया प्रभुर मने आनन्द अपार ॥71॥
 
 
अनुवाद
चन्द्रशेखर ने सनातन गोस्वामी को नए वस्त्र भेंट किए, लेकिन सनातन ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। जब श्री चैतन्य महाप्रभु को यह समाचार मिला, तो वे असीम प्रसन्न हुए।
 
Chandrashekhar offered Sanatana Goswami new clothes, but Sanatana refused to accept them. When Sri Chaitanya Mahaprabhu heard this news, he was overjoyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)