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श्लोक 2.20.54  |
तबे प्रभु ताँर हात धरि’ लञा गेला ।
पिण्डार उपरे आपन - पाशे वसाइला ॥54॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु ने सनातन गोस्वामी का हाथ पकड़कर उन्हें अन्दर ले जाकर अपने पास एक ऊँचे स्थान पर बैठाया। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu took Chandrashekhar by the hand and took him inside and made him sit on a high seat next to him. |
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