श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.20.52 
प्रभु - स्पर्शे प्रेमाविष्ट हइला सनातन ।
‘मोरे ना छुडिह’ - कहे गद्गद - वचन ॥52॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही श्री चैतन्य महाप्रभु ने सनातन गोस्वामी को स्पर्श किया, सनातन भी प्रेम से अभिभूत हो गए। लड़खड़ाती आवाज़ में उन्होंने कहा, "हे प्रभु, मुझे स्पर्श न करें।"
 
Upon being touched by Sri Chaitanya Mahaprabhu, Sanatana Goswami was overcome with love. He said in a tearful voice, “O Lord, please do not touch me.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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