श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.20.48 
‘द्वारेते वैष्णव ना हि’ - प्रभुरे कहिल ।
‘केह हय’ करि’ प्रभु ताहारे पुछिल ॥48॥
 
 
अनुवाद
जब चन्द्रशेखर ने भगवान को बताया कि उनके द्वार पर कोई वैष्णव नहीं है, तो भगवान ने उनसे पूछा, "क्या तुम्हारे द्वार पर कोई है?"
 
When Chandrashekhar told Mahaprabhu that there was no Vaishnava at his door, Mahaprabhu asked, “Is there anyone at your door?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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