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श्लोक 2.20.44  |
यत्न करि’ तेंहो एक भोट - कम्बल दिल ।
गङ्गा पार करि’ दिल - गोसाञि चलिल ॥44॥ |
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| अनुवाद |
| श्रीकान्त ने बड़ी सावधानी से उन्हें एक ऊनी कम्बल दिया और गंगा पार कराने में उनकी सहायता की। इस प्रकार सनातन गोस्वामी पुनः चले गए। |
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| Srikanta carefully gave him a woolen blanket and helped him cross the Ganges. Thus, Sanatana Goswami set off again. |
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