श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 401
 
 
श्लोक  2.20.401 
कृष्णस्य पूर्णतमता व्यक्तीभूगोकुलान्तरे ।
पूर्णता पूर्णतरता द्वारका - मथुरादिषु ॥401॥
 
 
अनुवाद
“कृष्ण के पूर्णतम गुण वृन्दावन में प्रकट होते हैं, तथा उनके पूर्णतम और अधिक पूर्ण गुण द्वारका और मथुरा में प्रकट होते हैं।”
 
“Krishna's most perfect qualities are manifested in Vrindavan, and his more perfect and more perfect qualities are manifested in Dwaraka and Mathura.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)