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श्लोक 2.20.40  |
टुङगि उपर व सि’ सेइ गोसाञि रे देखिल ।
रात्र्ये एक - जन - सङ्गे गोसाञि - पाश आइल ॥40॥ |
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| अनुवाद |
| जब श्रीकांत एक ऊँचे स्थान पर बैठे थे, तो उन्हें सनातन गोस्वामी दिखाई दिए। उसी रात वे एक सेवक को लेकर सनातन गोस्वामी के दर्शन करने गए। |
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| Srikanta saw Sanatana Goswami sitting on a raised platform. So that night he went there to meet Sanatana Goswami, taking with him a servant. |
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