श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 383
 
 
श्लोक  2.20.383 
एइ - मत सब लीला - येन गङ्गा - धार ।
से - से लीला प्रकट करे व्रजेन्द्र कुमार ॥383॥
 
 
अनुवाद
"इस प्रकार भगवान की लीलाएँ बहते गंगाजल के समान हैं। इस प्रकार सभी लीलाएँ नंद महाराज के पुत्र द्वारा प्रकट की जाती हैं।"
 
"Thus the Lord's pastimes are like the flowing waters of the Ganges. They are thus revealed by the son of Nanda Maharaja."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)