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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा
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श्लोक 356
श्लोक
2.20.356
‘स्वरूप’ - लक्षण, आर ‘तटस्थ - लक्षण’ ।
एइ दुइ लक्षणे ‘वस्तु’ जाने मुनि - गण ॥356॥
अनुवाद
“दो लक्षणों से - व्यक्तिगत लक्षण और सीमांत लक्षण - महान ऋषि किसी वस्तु को समझ सकते हैं।
“Great sages can understand an object through two characteristics – the characteristics of its form and the neutral characteristics.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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