श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.20.35 
ईशान कहे, - “एक मोहर आछे अवशेष” ।
गोसाञि कहे, - “मोहर लञा याह’ तुमि देश” ॥35॥
 
 
अनुवाद
ईशान ने उत्तर दिया, “मेरे पास अभी भी एक स्वर्ण मुद्रा है।” तब सनातन गोस्वामी ने कहा, “यह मुद्रा ले लो और अपने घर लौट जाओ।” तब सनातन गोस्वामी ने कहा, “यह मुद्रा ले लो और अपने घर लौट जाओ।”
 
Ishana replied, “I still have one gold coin.” Then Sanatana Goswami said, “Take this coin and return home.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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