श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 344
 
 
श्लोक  2.20.344 
कलेर्दोष - निधे राजन्नस्ति ह्येको महान्गुणः ।
कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्त - बन्धः परं व्रजेत् ॥344॥
 
 
अनुवाद
“हे राजन, यद्यपि कलियुग दोषों से भरा है, फिर भी इस युग में एक अच्छा गुण है। वह यह कि केवल हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने से ही मनुष्य भव-बन्धन से मुक्त हो सकता है और दिव्य लोक को प्राप्त हो सकता है।”
 
"O King, although Kaliyuga is full of flaws, there is still one excellent quality in this age. It is that simply by chanting the Hare Krishna mantra, one can be freed from material bondage and attain the transcendental abode."
तात्पर्य
जैसा कि ऊपर वर्णित है, यह श्लोक श्रीमद भागवतम् 12.3.51 का है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)