श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 341
 
 
श्लोक  2.20.341 
धर्म प्रवर्तन करे व्रजेन्द्र - नन्दन ।
प्रेमे गाय नाचे लोक करे सङ्कीर्तन ॥341॥
 
 
अनुवाद
"नंद महाराज के पुत्र भगवान कृष्ण स्वयं कलियुग के कर्म-कर्तव्य का प्रवर्तन करते हैं। वे स्वयं आनंदित होकर कीर्तन करते और नृत्य करते हैं, और इस प्रकार समस्त जगत सामूहिक रूप से कीर्तन करता है।"
 
"Lord Krishna, the son of Nanda Maharaja, personally initiated the vocational work (dharma) of Kaliyuga. He chants, dances in ecstasy, and thus the entire world joins in the collective chanting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)